RAJASTHANI BHASHA SAHITYA
Trending

पन्ना लाल पटेल की टाबरा वास्ते कहाणियां – मेणात सार : TABRA VASTE KAHANIYAN : MENAT SAR

TABRA VASTE KAHANIYAN : MENAT SAR

User Rating: Be the first one !

पन्ना लाल पटेल की टाबरा वास्ते कहाणियां – मेणात सार : TABRA VASTE KAHANIYAN : MENAT SAR

मेणात सार

एक दाण महादेवजी दनिया माथे घणो कोप कीदो| वणा ठाण लीदो के जठा तांई आ दनिया हुधरे नीं वठा तांई हंख नीं बजावूं| महादेवजी हंख बजावे तो बरखा व्है| वणा हंख वजावणो बंद कीधो तो वरखा वेणी भी बंद व्हैग्यी| काल माथे काल पडया| पाणी रो छांटो तक नीं बरस्यो| दनिया घणी कलपी| मनखे घणी ई परसादियाँ कीधी अर जागण दीदा| पण महादेवजी आपणा प्रण ऊं नीं डग्या|
एक दाण महादेवजी अर पारवतीजी गगन (आकाश) में उडता जाईस्या हॉ| तो वे कई देखे के एक करसो वनाँ वरखा रा अस्या काल में भी खेत हाँकी स्यो है| खेत हाकवा में मगन व्हियो लगो अर परसेवा (पसीना) ऊं लथोलथ व्है रियो हो| तो अणी करसा ने देखी ने भोले बाबे (महादेवजी) मन में इजरज कयोर् के पाणी बरसिया ने तो बरस बीतग्या पण अणा करसा रो यो काई वेण्डपणो! विमाण ऊं नीचे उतर्या| करसा ने पूछयो — “बावला, फालतू क्यूँ खेतां मॉ आफले? सूखी धरती में क्यूँ पसीनो खेरु करे? पाणी रा तो सपना ई कोई आवे नीं|
करसो बोल्यो — “हॉची फरमावो| पण खेत हाकवा री आदत नीं भूली जाऊं, अणी खातर म्हूँ तो आये साल खेत हाकूं| हाकवा री आदत भूलग्यो तो म्हैं पाणी पडया भी खेत नीं हाके (जोत) स्कूलां| पछे खाली पाणीऊं ईज़ कई व्हेला?” या बात महादेवजी रे हीये ढूकी| महादेवजी मन में वचार कयोर्— “म्हनै भी हंख बजायां घणां बरस व्हैग्या है| कठेई महूँ हंख बजावणो भूल तो नीं ग्यो| यो वचार करेन महादेवजी खेत में ऊभा का ईझ जोर ऊं हंख फूक्यो| चौफेर (चारो ओर) घटा उमड़ी| बादलां में गड़गड़ाट वीं| अर धरती परे अणमाप पाणी पडयो|

इन्हें जरूर पढ़े 

  1. कमला कमलेश रचना – वां दनां की बातां : KAMLA AKMLESH VA DANAN KI BATAN
  2. राजस्थानी वात : वात ऊदे उगमणावत-री RAJASTHANI VAAT : VAAT UDE UGAMNAVAT RI
  3. चंद्रशेखर आजाद की जीवनी : CHANDRASHEKHAR AJAD BIOGRAPHY IN HINDI
  4. टाबरा वास्ते कहाणियां : मकोड़ा वालो ढोल : TABRAVASTE KAHANIYAN MAKODA VALO DHOL
  5. पन्नालाल कटारिया : झूमको बातां री कहांणी संग्रै 2: JHMAKO BATAN RI KAHANI SANGRAH 2

हरड़ड़ भदिंगोक हो!
एक ठाकरसा आपणाँ महलां माऊं घओ हारो दारू पीयेन हेटे उतरता हा| नाल (सीढ़िया) खासी-भली (घणी) हाँकड़ी ही| तरवार अर दारू ऊं कुण नीं पड़े? हाथी भी वण्डे हामे नीं टकी सके| पछे मनख री कई केणी? ठाकरसा तन्नाटी खायने थोड़ा सा डग्या, अर गड़िंद गड़िंद नाल ऊं गुड़किया|
हेटे चौक में केई हाजरिया, हजुरियाँ, कणवारियाँ अर कामदार ऊबा थका हा| ठाकरसा एक पंगतियाऊं दूजे पंगतिये पड़ता आवे तो संगला जणा जोर ऊं बोले, — “खम्मा, खम्मा !”
नाल ऊपरे ठाकरसा रा गड़िंदा अर हेटे खम्मा खम्मा री घोक|
नाल रे अधवचैई (बीच) आवतां ई ठाकरसा एक पंगतिया ऊं ट लिया अर ठेट हेटे आंगणे आई पडया| तो एक जाट जोर ऊं बोल्यो — “हरड़ड़ भदिंगोक हो !”
अठीने जाट रो जोर ऊं हरड़ड भदिंगोक करणो व्हियो अर व्हठी ने ठाकरसा रो घड़िंग करतां जोरू जमीं माथे पडणो व्हियो| ठाकरसा तो पडया केड़े हालिया (हिले) ई कोईनी|
हंगले जणे जाट ने एक लारे जोर ऊं दरपावता (डराते) थका केयो — “मूरख, नांढ़, वेण्डा, उज्जड़ कठारा ई, थने सरम आवे नीं कई, ठाकरसा पडया तो थे “हरड़ड़ भदिंगोक” क्यूँ बोल्यो? थने बोलवा री ई कई ठा पड़े कोईनी कई|
जाट पाछो पडूतर दीधो — ” थारी बापड़ी खम्मा खम्मा ऊं तो कई कारी लागी नीं, ठाकरसा गड़ता (गिरता) ई ग्या| पण म्हारै “हरड़ड भदिंगोक” बोलवारे पछे ठाकरसा हालिया (हिले) व्है तो बोलो| पछे थारी खम्मा वरती के म्हारो “हरड़ड भदिंगोक” वरतो| ठाकरसा जणी वगत ज़मीन माथे पडया तो व्हणा री आवाज़ “खम्मा खम्मा” जसी ही के “हरड़ड भदिंगोक” जसी ही बोलो? वेण्डा थां सब हो के म्हैं हूँ वचार करेन वतावो|

इन्हें जरूर पढ़े 

पन्ना लाल पटेल की टाबरा वास्ते कहाणियां – मेणात सार : TABRA VASTE KAHANIYAN : MENAT SAR

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker