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पन्नालाल कटारिया : झूमको बातां री कहांणी संग्रै 4: JHMAKO BATAN RI KAHANI SANGRAH 4

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पन्नालाल कटारिया : झूमको बातां री कहांणी संग्रै 4: JHMAKO BATAN RI KAHANI SANGRAH 4

 

कहानी : म्हारे उणरी बात

  • थाल री टणकार
  • रामू रो बछेरियो
  • जद धरती धूजी

थाल री टणकार बाजता ही पास गवाड़ी मांय पण सगला लोग घणा राजी होया। सगला ऐक दूजै सूं कैवण लागा कूकल रे बेटो जलम्यो है। घर मांय भांत भांत री जुगत करीजै। कूकला रो बूढो बाप गमनो आ सुणता ई जाणै मोट्यारपणो पाछो आयागो व्है। बो डांगड़ी रे स्सारै सेठ री दुकान पर कीं पईसा टक्का अर सीधा री जोड़ जुगत सारू राजी राजी व्हीर व्है जावै। वो हवले हवले दुकान तांई पूग्यो अर बारणा रे बारै बैठ खांसण लागो।

धन्नो सेठ दुकान मांय की ब्याज बटा रा हिसा में लाग्योड़ौ हो। गमना ने दुकान रे बारै देख सेठ रो चित हिसाब सूं टूटगौ। बो गमना ने देख्यो। सेठ रे कनै दो तीन मिनख फेरूं बैठा हा। बे कीं हिसाब किताब करावण सारू आया हा।

गमनी फेरूं डांगड़ी संभाली अर सियारो लेय दुकान मांय बड़तो थको बोल्यो घ्मजरो सेठ।’आव भई गमना, सेठ बोल्यो। सेठ गमना रे सांमी सावल देख्यो अर बोल्यो घ्किया गमना भई आज तो म्हनै थांरी बोली अर आंख्यां मांय की फेर निजर आवै है? म्हनै ई तो बताव कांई नुवी खबर ल्यायौ है?’

गमनौ कवेण लागौ-घ्सेठां घर में गीगो जलम्यो है, छोरा कुकला रे बेटो जलम्यो है।’कूकला रै पैलो टाबर इज जलम्यो, आ बात तो नीं ही पण अबकै बेटो जलम्यो हो।

कूकला रे दो बरसां री एक छोरी ही पण बा मांदी मांदी है। छोरी रे जलम पर थाल री टककार नी बाजै अर घर मांय मातम री छिंया पड़ जावै। आ समाज री ऐक कोजी रीत मानीजै।

गमनो सेठां ने कैवे-घ्सेठ कमीण कारू ने नेग, यार-भायलां ने गोठ, भैण भुवा ने कीं गहणां रो नेग देवण रसारू कीं पईसा टका चाईजै। घर मांय उच्छब सारू सीधो पण चाईजे। अबै पांच पचसा सिर होसी तो होसी। सेठां ! पईसो तो हाथ रो मैल है, आखिर मांनखो कमावै ई कुणसै दिन खातर है।’गमनो की पईसा टक्का अरसीधा री जुगत कर घरां आवै। बास गवाडी में घर र लाडू की हांती बंटीजै। सिझ्यां रा घर में लापसी रो भोजन बणाईजै। बास गवाड़ी में जीमण रो नूतो दिराजै। मिनख कर लुगायां गीगा रे हाथ में पांच पच्चीस रूपीया सरधा मुजब नालेर दैवे। गीगा रो अणूतो लाड करै।

कूकला रे घरां उच्छब मनाई जै, लुगाईयां मंगल गीत गावै-
थे तो देवो नीं रूपीड़ा रो दान
सूरज भल उगियो।
ऐ तो बाज्या है सोवन थाल
सूरज भल उगियो।
थारै जलमियो है लाडल पूत,
सूरज भल उगियो।
थारे हुई मातीजी री मेर
सूरज भल उगियो।

गीगा रो पालण रिपिया कवा सूं करीजै। सगलां मां बाप आ आस राखै कि उणरो लाडेसर बैगी सो मोट्यार व्है जावे, कमार ल्यावै। उणरो ब्याव होसी तो घर में बीनणी पण आसी। पुरखां रो नांव रेसी।

गीगा रो नांव टीकमो राख्यौ। बखत टीकमो पांच बरस रो हुग्यौ। कूकलो अर टीकमा रो दादो गमनो एक एक दिन गिणती करै हा, आज बो दिन आयगो।

छोटी गीता पण टीकमा रै सागै-सागै सात बरस री व्हैगी। पण उणरो कुण ध्यान राखै हो। बा कुणसी कमार देसी? बा तो परायो धन मानीजै। समाज में सगलां री आ इज मानता। इण मानता अर कोजी रीत रै कारण सीता ने स्कूल पण नीं मैली।
छोरा रे बांच बरस रो हयां उणने शारदा पूजावै, नालेर बधारे अर गीत गाईजै।
बना थे तो बांच बरस रा हुयग्या,
थे तो दूध पतासा पियग्या।

कूकलो उणरा लाडेसर री आंगली पकड़र स्कूल में नांव लिखावण सारू लै जावै। मास्टरजी ने टडीका री भुलावण दैवे। टीकमा रो पढ़ाई में मन नी लागै। पर इणनै पढ़ावणौ जरूरी है। टीकमो स्कूल जावण में आल टोल करै। स्कूल सूं न्हाट न्हाट घरां आ जावै। घर में लाड रे कारण बींनै कुण ई नीं पालै। टीकमा ने इया फटोल व्हेतां देख कूकल मन में विचारियो सीता ने टीकमा रे साथै साथै स्कूल मेल देवां तो दोन्यूं भाई भैण सियारा सूं स्कूल में बैछ जासी। टीका रै साथै सीता रो नांव पण मंडाय दियौ।

टीकमौ लाड रे कारण नीं पढ़ सकयौ। सालीना फैल व्हैतो गियो। सीता पढाई में हुस्यार, टीकमा सूं दस पांवड़ा आगै। टीकमौ दस बरसा में नीठा नीठ आठ किताब तांई पढ़ सक्यो। सीता री पढ़ाई देखतां थकां स्कूल रा माटङसाब ने समझावै के सीता ने स्कूल नीं छोडावै। पण सीता रे स्कूल भेजण सारू घर मं नित राड़ व्है। कूकला अर सीता री मां रे माटङसाब री बाद दाय आयगी।

अबै सीता स्कूल री पढ़ाई पूरी कर कॉलेज तांई पुगगी अर मन लगाय पढ़ाय करी। पढाई पूरी होयां बा नौकरी री जोड़ जगत में लागगी।

टीकमो तो आठ किताब पढ स्कूल छोड दी ही। अबै बो रूलेटां रै साथै रूलतो फिरै। घर में बेटो होवण रे कारण बींने कुण ई नीं पाले। इयां करतां वो कदै कदै दारू री मेहफलां में पण बैसण लागगो। बो घर आला रे कैणे सूं बारै व्हैगो।
समै किणनै उडीकै कोनी, बखत बीतता जेज नीं लागी अर बरस अठारै रो व्हैगो टीकमो। उमर पैली बो कोजी सोबत में फंसगो।

सीता ने पढाई अर जुगत रो फल बैगो मिलगो। बा कलेक्टर रा ओहदा तांई पूगगी। सीता रे कलक्टर बणण पे सगला बास गवाड़ी अर गांव रा लोग घणा राजी हुया। चारूं मेर सीता रा बखाम होवण लागा।

ओ दिन गमना अर कूकला खातर पण घोणो सोवणो हो। अबै बांने ठाह पड़ी के छोरा छोरी में फैर नीं राखणो चाईजै। बे टीकमा ने इयां गलियां गलियां रूलतो दैखे तो भाटा सूं माथो फोड़े, करै पण कांई। इण री कोजी रीत रे कारण वे सीता ने पछै स्कूल भेजी।

मीको मिल्यां छोर्या छोरा सूं चार पांवडा आगै चाल सकै है, जिंया सीता मैणत करनै कलक्टर रा ओहदा तांई पुगगी। टीकमौ जिणरै जलमियां थे थाल बाज्यो, लाडू बंटया। बो आज लाड रे पाण रूलेट अर फटोल बण मां बाप रो बोझ बण बैठो है।

सीता रो सगपण बैगो इज उणरै बराबरी रे ओहदै आलै रे साथै तय व्हैगो। सीता रो ठाट पाट सूं ब्याव पण व्हैगो।टीकमा रा फटोलपणा ने देखतां उणरो सगपण नीं होयो। कुण ई आपरी छोरी देखतां आंख्या खाडाड में नीं न्हाखणी चावै हा। बोईयां ई रूलतो रह्यो।

धनो सेठ उधारी रा तकादा खातर गमना रो पग आंगणो कर दियो। बो घणी ताकीद देवण लागौ। आ बात जद सीता ने ठाह पड़ी तो बा सगलो चुकारो कर दियो।

कूकला रो नांब बदल कुंदनमल राख दियो अर गमना रो नांव गुमानमल राख दियो गयो। अबपै दोन्यूं बाप बेटा कुंदनमलजी अर गुमानमलजी, कलेक्टर साहिबा रे बापू अर दादीज रे नांव सूं चोखला में जाणीजै। भा टीकमा रो नांव पण बदल टीकचंद बदल गियो गयो। भा ी नेइयां रूतो देख सीता बींनै प्रधानमंत्री रोजगार योजना आलो करजो दियो अर सीखी दीनी के छोटो मोटो काम कर।

टीकमचंद करजो मिलयां एक छोटी दुकान खोली दी। वो दुकानदार बणगो अर कीं कमावणो सरू करि दियो। अबै वो सगली गलत सोबत छोड़ धंधा में चित लगाय दियो।

टीकमचंद रा धंधा ने देखतां बींरो सगपण बैगो इज तय व्हैगो अर ब्याव पण व्हैगो।

रामू रे छोरा छोरी नीं हा। उणरै कनै फखत एक बछेरियो (गधेड़ी रो बच्चो) हो। घणो फुटरो रंग अर आंख उणयारे। रामू अर उणरी जोड़ायत बछेरा रो घणो लाड़ राखे। उणने ई’ज आपरो बेटो माने। बछेरियो आंगणां मांय उछल कूद करै अर आपरा धणी धिणियारी रे आले दौले फिरै।

रामू ऐक दिन इस्कूल रै कनै बैठ्यो-गांव रा छोरा छोरियां ने इस्कूल जाता देख्यो तो उणरै मन मां उंडो विचार आयो घ्क्यूं नीं म्हैं पण म्हारा बछेरिया ने इस्कूल मेलूं।’विचार करतो करतो घरां पूगौ अर मन री बात लुगाई सूं कही। लुगाईने पण आ बात सोलह आना जंचगी।

दूजै दिन सवार रा रामू बछेरिया ने लेय मूरी पकड्या इस्कूल पूगौ। बछेरिया ने फलसा रे बांध्यौ अर माटङसाब रै कनै जाय राम राम कियना अर कैवण लागौ-घ्माट’साब म्हारौ ओ बछेरियो म्हारै वास्तै बेटै सूं कीं कम कोनी। आप इणरो नांव इस्कूल मांय मांडो। थांरी फीस व्है जो म्हरै सूं लै लियो।’

माटङसाब बोल्या-घ्भई रामू। म्है इणरो नांव मांड देस्यूं, बारै महीने री मण बाजरी देतो रहिजै।’ठीक सा। थारै आ मण बाजरी पक्क्यात समझो, पण भणाई पढ़ाई में फरक नीं आवणी चाईजै रामू भुलावण देतो थको बोल्यो।

घ्अरे! रामू इणने गधैड़े सूं मिनखी नीं बणाय देवूं तो म्हारो नांव भी मास्टर ठोटीमल नी।’माङट साब छाती ठोक’र बोल्यो।

अबै रामू नेम सर बछेरिया नै इस्कूल रै फलसा रै बांध घरां आय जावै। इस्कूल री छुट्टी व्है जद माटङसाब बछेरिया रै एक पाटी लटकाय देवे इण पर दो चार मोटा मोटा आखर मांड देवै। काम नेम सर होवम लागो। बछेरिया घरां जद कदै…चिक..भौ..चिक..भौ…चालू करे तो दोन्यू धणी लुगाई घणा राजी व्है, घ्देख बढभागण बछेरिया आखर बांच रह्यो है, आधो निमख तो बणग्यौ लागै?’राम जोड़ायत नै केवे।

जोग री बात मिनौ डेढेक हुयौ के बछेरिया ने बटाऊ ताको राख’र आपरै डेरा मांय भेलौ कर जाता रह्या। माटङसाब फलसा कानी देखौ तो बछेरियो निजर नी आयो। माटङसाब करे पण कांई? उलूजाड़ में पड़गा। मन में विचरौ, घ्रामू ने कांई पडूतर देस्यूं? ‘फेरूं मन मांय कीं उंडौ विचार करियो, जितैङक बछेरिया ने घरां नी पूगतो देख रामू स्कूल कानी दौड़त थको माटङसाब साब ने ढाब्या। बोल्यो, घ्माटङसाब सगला छोरा छोरियां ने घरां जाता देख्या। म्हारो बछेरियो औजूं नी पूगौ।’
माटङसाब साब की हंसता थका बोल्यो, घ्अरे रामू, थूं अजै तांई उणनै बछेरियो इज गिणै। बो तो मिनख बणगो..मिनख..। है, ‘सांचणी..रामू घणौ राजी व्हीयौ अर बोल्यो है बो? बो तो जोधपुर सैर मांय लांठो अफसर बण्यो है। माटङसाब कह्यो। आछो सा, भगवान थांरौ भलो करै। रामू राजी राजी घरां पूग्यौ, लुगाई ने सगली बात बताई। लुगाण पण घणी राजी व्ही।

जोधपुर स्हैर जावण नै उतावणो रामू लगु ाई सूं भाड़ा री जोड़ जगत सारू कह्यो। घ्पईसा टका तो घर मांय है कोनी। बाजरी मण च्यारेक पड़ी है, जो भाड़ा जोगी लेय जावौ।’रामू री लुगाई रामू सूं कह्यो।

आछो। रामू गमछा में बाजरी री गांठ बांधी अर माथा माथै मेल हाथ में मुरी, सटियो अर तुसां री पोटली लेय राजी राजी रैल टेसण कांनी व्हीर व्हैगो। रामू खाथौ खाथौ टेसण पूग्यो। रामू रै रेल टेसण देखण रौ काम पैली बार पड़ियौ हो। मुसाफिर खाना री एक कुरसी माथै बैसगो। ईनै बीनै देखै अर ताका झांका करे।

रामूनै ईया बैठ्यौ देख एक भणियौ पढ़ियौ मोट्यार रामू सकूं पूछ्यौ घ्कहां जायेगा भाई।’
घ्जोधपुर रा अफसर कनै’राम बोल्यो मोट्यार नै समझतां जैज नीं लागी, बो जाणगौ के इ ै जोधपुर जावणौ है।

घ्तू ऐसा कर सामने जो खिड़की दिख रही है, वहा ँ से टिकट लेकर फिर उस तरफ काले ईजन वाली धुंआ निकलाती हुई गाड़ी आयेगी, झट से उसमे चढ जाना।’मोट्यार आंगली सूं सैण करतौ थको बोल्यौ।

रामू टिगट खिड़की रै सांमी जाय उभगौ। मांय एक टोपधारी मिनख टिगट बांटै हो, चित लगार देखण लागौ। रामू री बारी आई तो रामू बजारी गांठ खिड़की रे सामी मेल दी। टिगट बाबू देखतो रहग्यौ, रिसां बलतौ थकौ घ्अबै यह कह्या है? कहां जाना है तुझै? पैसे निकाल’टिगट बाबु बोल्यौ।

म्हारै कनै पईसा टका कोनी। म्हनै जाणो जोधुपर। म्हैं ल्यायौ बाजरी री गांठ। थारौ माथा उपरलौ ठाठियो (टोप) नीचो मेल राम झटझट टिगर बाबू रै सवालां रौ वडूतर देतो थको बोल्यो।

अबै गंवार कहीं के। यहां बाजरी नहीं ली जाती है। टिगट बाबू फेरूं चिढ़ियौ।

रामू तो टिगट बाबू रै चींचड़ा री जयां चिपगो। टिगट बापू आखिर तंग व्है टोप उतारियो अर रामू रै सामी राख्यौ।

रामू तो झररर..बाजरी गांठ टोप मांय खाली कर दी अर कीं राख दी। टिगट बापू माथो ठणकतो थको जोधपुर रो टिगट रामू रे हाथ में झिलायौ।

टिगत हाथ में लेय रामू चीला कानी निजर न्हाखी। सिंझ्या लटैटगै सवा नव बजया हा।

अलगौ सी एक मिनख काला गाभा (कोट पेंट) पैरयां हाथ में सिगरेट, मूंडै सूं धुंआ रा गोठ उडावतौ थको चीलरां रै बीचालै आवतौ निजर आयो (बो रेले रौ पैठवान हो)

रामू री आंख्यां मांय कीं चिमक वापरी बो मन मांय राजी व्हीयो, घ्आई रेल। इणनै नी झाली तो हाथा सूं जाती रैसी। फेरूं दूजी ठाह नीं कदै आसी?’
रामू तो ताको राखर ऊभो हो। पैठवान चीलां रै बिचालै बिचालै हाथ में लालटेण अर मुंहडा में सूं धुंआ रा गोठ उडावतो थको राम रै नेड़ै आया पूछ्यो, कहां जाना है तुझे? रामू तो ताको राखर चढ़गो बीरै घोड़े पलाण। फेरू बोल्यो जोधपुर जावणौ है।

पैठवान तो हाबाकियो व्हैगो बोल्यो, यह क्या बदमतीजी है? रेल रौ टिगट है म्हारै कनै। रामू छाती ताणर बोल्यो। अबै। नीचे उतर। पैठवान कड़कर बोल्यौ। ठाठियो भरर बाजारी दीनी है, रामू फेरू बोल्यौ।

अबै क्या बक रहा है? पेठवान फेरूं कड़कियौ। बकरो कोनी गधेड़ी है, रामू पडूतर देतौ थको बोल्यौ।

अबै नीचे उत्तर..नीचे उत्तर..पैठवान जोर सूं हाका हूक मांड्या।

दो तीनेक बडाऊ दौड़र आया रामू नै हेठौ उतारियो अर कीं भुलावण घाथी। थोड़ी ताल में सूं रेल छुक..छुक..करती धुंआ रा गोठ उडावती प्लेट फार्म माथै पूगी। रामू तो आवती रै ई झांप घातर डब्बा रै उचालै चढ़गौ। रामू नै इंया उचालै चढ्यो देख रेलवे रा दोयेक नौकर चाकर आया अर बीनै सावल बैठायो। रामू ने कीं बात दाय नी आई तो बो छानो मानो गलियारा बीचालै बैसगो।

गार्ड बाबू सिटि बजाई अर हरी झंडी बतावतां रेल व्हीर व्हैगी।

रेल चीला माथै सरपट दौड़ण लागी। गाड़ी रा हिचकोला सूं रामू ने मीठी मीठी नींद आयगी। रे जोधपुर टेसण पूगतां ही प्लेटफार्म माथै मिनखां रौ हियो हियो लाग्योड़ौ। सगला जोधपुर..जोधपुर करता करता आप आप रा बींटा संभाल्या।

रामू नै पण जगायो भई, उठ देसण आयगो। रामू झट व्हीर व्हैगो दूजा मिनखां रे देख देख टिगट बाबू ने टिगट झेलाया, गेठ सूं बारै निसरियौ। बारै गांडियां री जमघट अर मानखा री हियो हियो देख रामू तो जाणै डाफाचूक व्हैगो। फेरूं एक तांगा आला रै नेड़ै सी जाय मोटा अफसर कनै पूगावण रौ कह्यो। रामू तांगा माथै सवार व्है गलियां मांय गोता खावै।

तांगा आला नै कीं गतागम नी पड़ी तो बो रामू नै एक दफ्तर रै कनै उतार दियो। तागां आला रौ भाड़ो कीं बाजरी बीरै कनै बच्योड़ी ही दे दीनी।

रामू गेट रै नेड़ौ पूगो तो चोकीदार बीनै पाल दियो। किससे मिलना है? चौकीदार रोब सूं बोल्यो।

मोटा अफसर रौ बापू हू अर उण सूं इज मिलणौ हे। रामू पडूतर दियौ।

चौकीदार कीं संकियौ अर बल्ला गलै नी लेवण में चौखौ मान्यौ। रामू नै छूट दे दीनी।

दफ्तर मांय बड़ बारणा रै कनै थलैटी माथै उभ रामू चारूं कानी नजिर न्हाखी अर करड़ौ धज्ज व्हा सगला रै माथै विडियो कैमरा रै जिंया निजर न्हाखी।

रामू मन में विचारियो ईंया कां ी ठाह लागसी आपां आलौ कुणसौ है? बीनै बात याद आयगी के तुस री पोटली बताया ठा लागसी। बो तुस री पोटली ऊंची कर सगला सामी सैण करण लागौ। दफ्तर रा सगला नौकर रामू नै आंख्या रा डोला काढ काढ देखण लागगा, क्यूंक नजारो कीं अनोखौ हो।

जितै सी सामी साम ोटी कुरसी माथै बैठ्यौ एक जाड़ौ मातौ नौकर हाथ सूं सैण करी। बोई दफ्तर रो सै सूं मोटो अफसर हो। अफसर मन ई मन हरखै, मुरगी चोखी फसी। कीं माल ताल सांतरो लायो दिसै। लोभी जीवड़ौ मन ई मन घणौ राजी व्हियो। बो दफ्तर रा दूजा नौकरां नै पर्सनल बात रो कह थोड़ी ताल वास्तै बारै जावण रो हुकम दियौ। सगला अफसर रै हुकम नै अंगेज कर लियो अर बारै बैसगा।

अबै रामू अफसर रै नेड़ौ पूगो अर धोती री खोल्यां खोसर मींडका (डेडरिया) री नांई उछलर अफसर री कुरसी रै सामाला पाटा माथै चढगौ। अफसर री आंख्यां मांय आंख्या घाती, फेरू नाड़ ठणकी अर विचारियो घणो फेर फार तो निजर नी आवे। पर भणाई पढ़ाई सूं कीं फेर फार तो व्है ई है।

अफसर आंख्या माथै मोटो चस्मौ लगायां बठ्यौ रामू पण आंख्या फाड़ फाड़र देखे हो।

घ्म्हारै बिना पूछ्यां कियां आयोग?’रामू अफसर सूं कह्यो।

कह्या बकता है? काम की बात कर..कितना लाहा है? जिल्दी निकला दूसरे देख लेंगे। अफसर बोल्यो। अफसर कीं घूसखोर हो।

रामू रै कीं पल्लै नीं पड़ी..बो तो बोल्यो न चाल्यौ, ताकौ राखर नाड़ काठी झाली अर अर मुरी घातर दो च्यारेक जोर सूं सटीक मेल्या मोर तणा। म्हारै सूं लपलप..थारे खातर बारजी री कोठी खाली कर न्हाखी। रामू बापा बारै व्हैगो। अफसर रै मूंडै सूं फेफूंड अर आंख्यां रा डोला बारै आयगा, रामू बींनै साख्यात् जमदूत रौ रूप नजिर आवे हो।

अफसरो बोल्यो, थूं कांई चावै है म्हारा बाप। हां। अबै पूगौ नी ठाणै..। रामू नाड़ ठिणकतो थको बोल्यौ।

रिपिया चाईजै म्हनै..रिपिया।थारी तनख्वाह..। मरतौ कांई करतो..अफसर जेब सूं रिपिया री एक गिड्डी रामू रै हाथ में झेलाय दी अर विचारियो ई साटे ई पिराण तो बचिया।

रामू रिपिया री गिड्डि लेय पाछो गांव पूगो। गांव रा सगला मिनखां ने बीती बात बता ी तो लोगां आपरा छोरी छोरियां नै इस्कूल मेल्या ई विचार में के एक बछेरियो भणाई पढ़ाई सूं मिनख बण सकैतो ऐ टाबर तो देस रा मोटा सूं मोटा नेता अर अफसर अवस व्है सकेला।

रामू इण भांत आपरी अकल हुशियारी रै पाण आपरा गांव मांय पढ़ाई री नुंवी जोत जगाय दी।

26 जनवरी, 2001 रो वो दिन सवार रा लगैटगै नव सावा नव बज्या हा। जद धरती धूजी। आंखो गुजरात अर मरू ुधरा हिंडा हिंड़ण लागी। सगला मानखौ खुरलावण लागो। कुण ई बोले भूकम्प आयगो अर कुण ई बोले धरती धूजी। मानखा में च्यारूमेर भागा दौड़ लागी। हाहाकार मचगो। मोटा मोटा गंगाल दस माला सूं लेयर पचास साठ माला ताणी रा देखतां देखतां तास रै पत्ता रै जिंया खिडंगा अर धूड़ भेला व्हैगा। अणगिन मानखौ जीवतौ बूरीजगौ। सगला जीवता समाधी लैय ली, लेवै कुण हो ओर कुमाणस बगत धिंगाणे दे दी। मोटी मोटी होटलां, दफ्तर, पोसाहां, कारखाना पूरा सैर अर गांव रा गांव मसाण घाट में बदलगा। लासां रा ढिगाल व्हैगा। जीवता रह्या बे एक दूजा खातर आंसूड़ा नितारै हा। मां बाप टाबरां खातर, बैन भाई खातर, लुगाई धणी खातर, घणकरा टाबर रूदरा व्हैगा। लुगायां रांडीजगी। केई लुला पांगला व्हेगा।

आज तांई बो दिन आंख्या रै सामी जमदूत रै जिंया उभौ दिसै।

बो दिन गुजरात ई कांई सगली दुनिया याद राखसी, जद धरती धूजी।

चारू मेर जमी मसाण बणगी, लासां रा ढिगला पड़या हा। सगली लासां नै एक साथै धरम करम अर जांत पांत नै पर राख अगनी नै सुपरत करिज्या।

रूगनाथौ ओ दिन उणरा झूंपड़ा रै बारै बैठ्यौ बींरी आंख्यां सूं देख्यौ हो। उणरी आंख्यां रै सामती बो दरसाव फोर फोर आवै हो।

रूगनाथ राजस्थान में काल रो सतायोड़ी घर बार समेत कमावण साय गुजरात कानी गियो हो। पर कुदरत रूगनाथा रै मेलावा रो लारौ काठो झाल दियो।

रूगनाथ अलगो सो ऊभौ डर रौ मारिय ो थर थर धूजै हो। बो एक झूंपड़ा मांय आपरा मेलावा सागै दुख रा दिनड़ा काटण सारू गांव सूं अठै पूगौ हो। बो मैणत मजरू ी कर मेलावा रो पेट भरण रौ जुगाड़ करतौ हो।

आज रूगनाथा रो झूंपड़ो जिंया रो तियं ा अर सागी ठौड़ जमयोड़ो हो, रूगनाथो आपरा झूंपड़ा अर मेलावा ने राजी खुशी देख हरखै हो। बो विचार में डूबगौ टाबरियां भूख सूं अधमरिया तो व्हैगा पर जीवता तो है।

रूगनाथ रै मूंडा रौ नूर चाणचक उतरगो बो उंडा विचारां मांय डूबगो, मगज मांय उणरो भूख सूं तड़पतौ मेलावो गतोला खावैहो। मेलावा रौ पेट भरण खातर कीं मजूरी मिल जाती ही। पर जद धरती धूजी बीं दिन सूं तो इण धरती रौ रूप ई बदलगो हो। चारूं मेर हाहाकार मच्यो हो, कठै मजूरी अर रोटी?

किणी मजूर नै मजूरी नी मिलण रौ सीधी मतलब भूख नै नूतौ देवण मानीजै। मेलावा रै भूखा रेवण री आवटण सूं रूगनाथो मांदो पड़गौ। बींनै ताव आयगो। बीं रौ डील ताव सूं सिकेहो। झूंपडा में पईसो एक नी अर होयां भी व्है कांई। दवाई कठां सूं लावै?

रूगनाथा री जोड़ायत टीपू उणरी लिलाड़ माथै गाभौ भिजोय मेल राख्यो हो। बी रा टाबर उणरा पीला पड्या डील नै टुकर टुकर देखे हा। रूगनाथो पण आपरा लुगागई टाबरां नै देखे हो। बी री आंख्यां सूं पाणई री धार छुटगी जोर सूं रोवण लाग्यो। बो मेलावा नै जीव सूं बैसी लाड करै हो। उणरा टाबर लारला जीन चार दिनां सूं साव भूख हा। उण दिन सूं जद धरती धूजी ही।

रूगनाथो पूरो जोर लगाय मांची सूं ऊभौ व्हैगो। उणरौ कमजरो डील हींड़ा खावै हो। भींत रौ अडखण लेय बो जमी माथै आबचिंतो उभौ व्हैगो।

बो राज सूं मिलण आलौ ईमदाद लेवण सारू व्हीर व्हैगो। बठै पूग्यां मानखां रो हियो हियो लाग्योड़ो देखता पाण बीं रो तो मूंडो उतरगो। थोड़ी ताल बो ईया ई ऊभौ ऊभौ देखतौ रह्यो, चाणचक बीं रे मांय एक अणूती सगती वापरी। बो मन मांय कीं बोल्यो, घ्म्हैं म्हारी आंख्यां रै सामी म्हारा टाबरां नै भूख सूं नी मरण देवूंला। म्हैं टाबरां खातर रोटी जरूर जरूर ले जावूंला।’

बो पूरी सगती सूं भीड़ी रै बिचालै बडगौ। रोट्यां बैंसण आली गाडी रै कनै पूगगो। गाडी रै डाला माथै ऊभा मिनख रै हाथ सूं रोट्यां रो बीड़ौ झपटर भीड सूं झूंझतो बारै आयोग। बारै आवतां ई उणरौ कमजोर अर मांदो डील सागी रूब बताय। बो धड़ाम देता जमी माथै पड़गो। आंख्यां आडी तिरमाली आयगी उणरै।

एकाद फेरूं आपौ संभालयौ तो उणरै हाथ में रोट्यां रौ बीड़ो हो अर मेलावा रो जीव? फेरू हिम्मत राख बो सूपड़ा आली दांडी सामी दौड़्यौ। रोट्यां रो बीड़ो लेय घरां पूगो। बीड़ो टीपू रै हाथ में झेलायो। रूगनाथो आज घणो राजी हो जाणे कठै रौ किलौ जीतर आयगो व्है।

रोट्यां रौ बीड़ो देख टाबपरां री आंख्या मांय चमक वापरगी। टाबरां नै इया देख रूगनाथा री आंख्या पण तर व्हैगी। आज उणरी आंख्यां सूं खूसी रा आंसूडा छलके हा। टीपू री आंख्यां पण तर व्हैगी। टाबरअर टीपू एक तर रूगनाथा ने देखे हा।

आज घणा दिना सूं मेलावा ने रोटी मिली ही। रूगनाथौ झूंपड़ा रै बारै पड़ी सागी मांची माथै पड़गी।

आभै सूं पटक्यौ अर खजूर में अक्यो आली कहावत रूगनाथा माथै सांगोपांग जचगी।

रूगनाथो गुजरात सूं जिंया तिंया पड़ धड़र उणरै गांव आयगो। आज पण रूगनाथो गुजरात री धरती रौ बो दिन मिनखां नै कैवतो नी भूले घ्जद धरती धूजी।’उमर सुद पुन्यु तांई बो दिन याद रैसी’जद धरती धूजी’

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